द्वारका स्थित भड़केश्वर महादेव मंदिर का रहस्य क्या है ? जाने पूरा सच 

द्वारका स्थित भड़केश्वर महादेव मंदिर का रहस्य क्या है ? जाने पूरा सच 

द्वारका स्थित भड़केश्वर महादेव मंदिर का रहस्य क्या है ? जाने पूरा सच 

द्वारका-


द्वारका के अरब सागर में मुख्य भूमि से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित श्री भड़केश्वर महादेव द्वारका के प्रमुख प्राचीन दर्शनीय स्थलों में से एक अत्यंत रमणीय शांत स्थल है।
ऐसी लोक कथा है कि प्राचीन काल में श्री कृष्ण की द्वारिका नगरी में सत्राजित नामक एक परम् शिव भक्त यादव रहता था उनकी कठोर तपस्या से इसी जगह भगवान भोलेनाथ शिव ने प्रगट हो कर वरदान मांगने के कहा तो वह शिव भक्त यादव ने कहा मुझे जीवन मे कोई काम न करना पड़े और जीवन निर्वाह चले ऐसा वर दीजिए ।
भक्त द्वारा ऐसा वरदान मांगने पर महादेव ने कहा यह भगवान श्री कृष्ण की कर्म भूमि है , श्री द्वारकाधीश जी कर्म के बिना फल देने की शिक्षा नही देते । 
अतः आप को कर्म तो करना होगा तो फल मिलेगा, लेकिन आपने वरदान मांगा है तो इस जगह का कोई खड़क को आप खोदिये- तोड़िये और द्वारका नगर ले जाइए , द्वारका जाते ही वह खड़क सोने का बन जायेगा । उनसे तुम्हे धन मिलता रहेगा ।
कहा जाता हैं कि खड़क पर पर प्रगट हुए और खड़क को सोने मे परिवर्तित होने का वरदान देने के कारण वहां प्रगट हुए महादेव खड़केश्वर कहलाये ।
गुजराती लोक भाषा में समुद्री खड़क को भेखड़ कहते है, इसी कारण नाम अपभ्रंश होने से महादेव का यह स्थान भड़केश्वर महादेव नाम से प्रसिद्ध हुआ, लोककथा की शिव भक्त यादव ने अपने जीवन काल मे उस जगह से इतने खड़क तोड़े की महादेव का स्थान मुख्य भूमि से अलग पड़ गया ।
श्रावण मास में और शिवरात्रि में यहां शिवभक्तों का मेला लगता है।
आज की युवा पीढ़ी भी समुद्री प्रवाह की दरकार न करते हुए इस जगह नियमित रूप से माथा लेकिने आती हैं ।
इसी शिवभक्त की लोककथा से प्रभावित हमारे पूर्वज शिवरात्रि के मेले में भड़केश्वर जाना है ऐसा न कहकर ऐसा कहा करते थे कि चलो भड़केश्वर सोना लेने जाना है !!!
शिवरात्रि में भड़केश्वर महादेव के पूजन - दर्शन के पश्चात घर लौटते समय वहां के समुद्र प्रवाह से घिस कर महीन गोलाकार बना एक दो पथ्थर घर लाते थे , उस पथ्थर को सोना कहते थे और तिजोरियों में अन्य जवाहरात के साथ रखते थे ।
कोई कोई ब्राह्मण परिवारों में ऐसे  भड़केश्वर महादेव के समुद्र तट के पथ्थर आज भी पूजा में देखे जाते हैं ।